इस मस्जिद का निर्माण मुगल सम्राट बाबर द्वारा सन 1528 के आसपास करवाया गया । माना जाता है कि हजरत जमाली यही रहते थे और अल्लाह की इबादत किया करते थे । सन 1536 में मौलाना जमाली की मृत्यु के बाद उन्हें इसी मस्जिद के आंगन में दफनाया गया। चूंकि इनकी कब्रे मस्जिद के आंगन में है इस कारण ये जमाली-कमली की मस्जिद के नाम से प्रसिद्ध हुई | मौलाना कमाली के मकबरे पर खूबसूरती से उनकी शेरो-शायरी भी उकेरी गई है
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