क्या आपको पता है कि जो राष्ट्रीय ध्वज आज हम फहराते हैं वो शुरूआत से ऐसा नहीं है.. इसका डिजाइन भी अलग था.. इसके रंग भी अलग थे और इसमे शामिल होने वाले प्रतीक भी अलग थे .. समय के साथ साथ इसमें कई तरह के बदलाव किए गए और तब हमें वो राष्ट्रीय ध्वज मिला जिसे आज हम सब शान से फहराते हैं
क्या आप जानते हैं कि आजादी से पहले के समय में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाला अपना कोई झंडा नहीं था अंग्रेजो ने जब बंगाल का पार्टीशन कर दिया था तब तक भी अपना अलग झंडे बनाने को लेकर कोई खास जुस्तुजु नहीं थी लेकिन इसके एक साल बाद एंटी पार्टिशन मूवमेंट के समय एक झंडा फहराया गया जिसे सचिंद्रा प्रसाद बोस ने डिजाइन किया था इसके बाद मैडम भीकाजी रूस्तम कामा ने जर्मनी में आयोजित की गई दूसरी अंतर्राष्ट्रीय सोशलिस्ट कांग्रेस में उपस्थिति के दौरान अंग्रेजों से लड़ी जा रही लड़ाई पर भाषण दिया और एक झंडा लहराया जिसे हेमचंद्र दास ने तैयार किया था इसके कई सालों बाद 1917 में होम रूल आंदोलन के समय बाल गंगाधर तिलक और श्रीमति एनी बीसेंट ने एक झंडा तैयार किया था
इसके 4 साल बाद 1921 में गांधी जी ने शिक्षाविद और स्वतंत्रता सेनानी पिंग्ले वैंकैया से स्वतंत्रता आंदोलन के लिए के राष्ट्रीय झंडा तैयार करने के लिए कहा जिसमें चरखा शामिल करने के लिए कहा गया, जो कि आत्मनिर्भरता और आम आदमी की तरक्की का प्रतीक था इस झंडे को स्वराज फ्लैग, गांधी फ्लैग और चरखा फ्लैग भी कहा गया .. एक तथ्य यह भी है कि 1931 में झंडे में कुछ बदलाव और एक नया डिजाईन देने के लिए कराची में एक सात सदस्सीय कमेटी का गठन किया था
जब भारत से अंग्रेजो ने अपना कब्जा हटाया और आजादी दी तक तब सभी पार्टियों में सर्वसम्मति से एक राष्ट्रीय झंडे की जरूरत सामने आई तब डॉ राजेंद्र प्रसाद की अगुवाई में एक कमेटी गठित की गई जिसे आजाद भारत का झंडा डिजाईन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई, गांधी जी की सहमति के बाद पिंग्ले वैंकैया के झंडे को नया रूप देने का निर्णय लिया गया, इसमें चरखे की जगह अशोक सारनाथ पिलर का प्रतीक, चक्र, लिया गया, झंडे में शामिल किए गए रंगो में किसी एक का भी कोई सांप्रदायिक महत्व नहीं था, भारत का राष्ट्रीय झंडा स्वतंत्रता मिलने से कुछ दिन पहले काँस्टीटुवेंट एसेंबली की मीटिंग के दौरान 22 जुलाई 1947 को एडोप्ट किया गया था
एक रोचक तथ्य ये है कि 15 अगस्त 1947 से 26 जनवरी 1950 के बीच ये झंडा अधिराज्य भारत यानी डोमिनियन इंडिया का राष्ट्रीय झंडा था लेकिन 26 जनवरी 1950 के बाद से ये भारत गणराज्य का झंडा बन गया, भारत में भारतीय राष्ट्रीय झंडे को तिरंगा और ट्राई कलर भी कहा जाता है
इसके आकार की बात करें तो इसमें सबसे ऊपर केसरी रंग है, बीच में सफेद और फिर नीचे की तरफ गहरा हरा रंग है लेकिन तीनो ही रंग की पट्टिया समान आकार की हैं झंडे की चौड़ाई और लंबाई 2:3 के अनुपात में है सफेद पट्टी के बीचो बीच एक नेवी ब्लू रंगा का चक्र है इसके बारे में हम बता चुके हैं कि ये अशोक सारनाथ पिलर का प्रतीक है..इस चक्र का व्यास सफेद पट्टी के व्यास के लगभग बराबर होता है जिसमें 24 तीलियां होती हैं
झंडे में शामिल रंगो का भी महत्व है केसरी रंग साहस का प्रतीक है, सफेद रंग शांति का और चक्र, धर्म चक्र के साथ सच्चाई को दर्शाता है इसी तरह हरा रंग प्रजनन क्षमता, वृद्धि और धरती की शुभता दर्शाता है
झंडे में शामिल चक्र के बारे में ये तथ्य है कि ये बताता है कि आगे बढ़ने का नाम ही जीवन है और रूक जाना मरने के समान है
भारतीय राष्ट्रीय ध्वज पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू नें 15 अगस्त 1947 को लाल किले के लाहौरी गेट पर सबसे पहले फहराया था
लेकिन सबसे पहला भारतीय झंडा 7 अगसत् 1906 को कलकत्ता के पारसी बगान स्केवेयर में फहराया गया था जिसमें तीन पट्टियां थी सबसे ऊपर हरी बीच में पीली और सबसे नीचे लाल पट्टी..इसमें वंदे मातरम लिखा और साथ ही कई धार्मिक प्रतीक भी थे
26 जनवरी 2002 को भारतीय झंडे से जुड़े कोड में कुछ बदलाव भी किया गया, आजादी के कई साल बाद अब भारतीय अपने घरों, कार्यालयों और फैक्ट्री पर राष्ट्रीय झंडा फहरा सकते हैं अब भारतीय नागरिक किसी भी दिन राष्ट्रीय झंडा फहरा सकते हैं लेकिन इसके साथ ही झंडे का सम्मान भी इसके कोड का एक हिस्सा है जिसका काफी सख्ती के साथ पालन किया जाता है
फ्लैग कोड इंडिया 2002 को आसानी की नजर से तीन पार्ट में बांटा गया पहले पार्ट में झंडे से जुड़ी समान्य व्याख्या है दूसरा पार्ट सामान्य जन, प्राइवेट संस्थाएं और शिक्षण संस्थाओं इत्यादी में राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शित करने को लेकर समर्पित है वहीं तीसरा पार्ट में दिया गया कोड केंद्रीय और राज्य सरकारों और उनकी संस्थाओं और एजेंसियो में राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शित करने से संबंधित है
26 जनवरी 2002 के नियमों के आधार पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के कुछ नियम भी बनाए गए हैं झंडे का इस्तेमाल किसी भी तरह केसांप्रदायिक फायदे के लिए नहीं किया जा सकता और न ही इसे पर्दे की तरह या फिर कपड़े की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है न ही झंडे को जमीन पर गिरने देना चाहिए और न ही पानी में डालना चाहिए
कोई भी दूसरा झंडा राष्ट्रीय ध्वज से ऊंचा नहीं होना चाहिए, झंडे के ऊपर फूल मालाएं भी नहीं लगा सकते
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आहवान पर हम सब भारतीय आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं जिसकी सबसे आकर्षक कड़ी हर घर तिरंगा अभियान है अपने मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने सभी देशवासियों से अपने घरों में तिरंगा फहराने का आहवान किया, साथ ही सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर तिरंगे को प्रोफाइल पिक्चर बनाने के लिए उत्साहित किया था
दुनिया का सबसे बड़ा तिरंगा 15 जनवरी 2022 को जैसलमेर में आर्मी दिवस के दिन फहराया गया था
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